Ranikhet bimari ka kaise ilaaj karna hai
रानिखेत का इलाज नहीं, सहारा और रोकथाम ही असली काम है। पहले बीमार मुर्गी को अलग कर दीजिए, झुंड में पानी और दाना साफ रखिए, और जो पक्षी बहुत कमजोर है उसे गर्म, सूखी जगह पर रखिए। अगर सांस फूल रही है, गर्दन टेढ़ी है, हरा या पानी जैसा दस्त है, तो यह तेज़ फैलने वाली बीमारी हो सकती है। मृत पक्षी को हाथ से न छुएँ, दस्ताने और मास्क लगाइए, और बाकी झुंड को तुरंत बचाने के लिए पशु चिकित्सक की मदद लीजिए। स���फ पानी में इलेक्ट्रोलाइट मिलाकर दीजिए, भीड़ कम कीजिए, और शेड में हवा का अच्छा इंतज़ाम रखिए। अगर झुंड में कई पक्षी बीमार हैं या मौत शुरू हो गई है, तो आज ही सरकारी पशु चिकित्सालय या पशु चिकित्सक से संपर्क कीजिए। यह जल्दी संभालने से बड़ा नुकसान रुक जाता है।
Region: Ambadola B.O, NABARANGPUR, ODISHA

